वाजिद शाज़ली
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वाजिद शाज़ली

zoya khan

0 нравится3:2730 сент. 2026 г.

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### 🌹 कलाम — डॉ. अब्दुल वाजिद शाज़ली 🌹 ज़िक्र-ए-मुर्शिद से महकता है दिल-ए-बेक़रार, फ़ैज़-ए-मुर्शिद से मुअत्तर है हमारा दिल-ओ-जान। डॉ. अब्दुल वाजिद शाज़ली, ये नाम-ए-अहल-ए-दिल, जिनकी निस्बत से मुनव्वर है हमारा हर महफ़िल। शाज़ली निस्बत, क़ादरिया निस्बत, सुहरवर्दिया फ़ैज़, चिश्तिया की मोहब्बत से मिला इश्क़-ए-अज़ीम। सिलसिला-ए-इश्क़-ए-हक़ का ये हसीं उनवान है, अहल-ए-दिल के वास्ते ये बाब-ए-फ़ैज़-ओ-इरफ़ान है। जिनकी सोहबत से मिले क़ल्ब को कैफ़-ओ-सुरूर, जिनकी निगाह-ए-करम से हो हर इक दिल पुर-नूर। उनके फ़ैज़-ए-नज़र का हम पे रहे साया-ए-करम, लब पे जारी हो हमेशा उनका ज़िक्र-ए-मुकर्रम। या इलाही! क़ायम-ओ-दायम रहे ये सिलसिला, फ़ैज़-ए-मुर्शिद से रहे आबाद हर इक दिल सदा। शाज़ली, क़ादरी, सुहरवर्दी, चिश्तिया की बहार, इनकी निस्बत से अता हो इश्क़-ए-अहमद बार-बार। सर झुका कर अर्ज़ है, ऐ साहिब-ए-फ़ैज़-ओ-कमाल, हम पे क़ायम रखिए अपनी चश्म-ए-लुत्फ़-ओ-जमाल। दिल में हो उल्फ़त, ज़ुबाँ पर हो दरूद-ओ-सलाम, और रहे ता-उम्र उनका फ़ैज़-ए-करम बे-मिसाल। 🌹