
हनुमान सा उठ चल
Akriti Kakkar
Criada com HeartMuLa
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Prompt
अंतरा 1 जब राहें लंबी हों, रातें अँधेरी हों, जब सपनों की राह में मुश्किलें घनी हों, याद कर उस शक्ति को, जो भीतर है छिपी, एक कदम साहस का—फिर जीत होगी पक्की। पूर्व-मुखड़ा सीने में विश्वास रख, हौसलों को साथ रख, पर्वत भी झुक जाएगा, तू बस अपना हाथ रख। मुखड़ा हनुमान सा उठ चल, वीर बन, सच्चा बन, भक्ति को अपनी शक्ति बना, आगे बढ़ता चल। सागर भी पार होगा, हर डर भी हार जाएगा, जिस शक्ति को तू ढूँढ़ रहा, वो तुझमें ही मिल जाएगा। हनुमान सा उठ चल, अपने पंखों को खोल, “असंभव” को बदल दे तू—“मैं कर सकता हूँ” बोल। सच्चाई को अपना मार्ग बना, साहस को अपनी जान, डटकर चल, बढ़कर चल—जय हो हनुमान! अंतरा 2 जब शंका घेरे मन को, विश्वास जगाना तू, जब डर रोके कदमों को, आगे बढ़ जाना तू। आँधियाँ चाहे जितनी हों, दीपक तू जलाए रख, हर मुश्किल के सामने अपना सिर उठाए रख। पूर्व-मुखड़ा अनुशासन को ढाल बना, सेवा को सम्मान बना, दुनिया चाहे रोक ले, तू खुद को पहचान ज़रा। मुखड़ा हनुमान सा उठ चल, वीर बन, सच्चा बन, भक्ति को अपनी शक्ति बना, आगे बढ़ता चल। सागर भी पार होगा, हर डर भी हार जाएगा, जिस शक्ति को तू ढूँढ़ रहा, वो तुझमें ही मिल जाएगा। हनुमान सा उठ चल, अपने पंखों को खोल, “असंभव” को बदल दे तू—“मैं कर सकता हूँ” बोल। सच्चाई को अपना मार्ग बना, साहस को अपनी जान, डटकर चल, बढ़कर चल—जय हो हनुमान! सेतु न शोहरत की चाहत हो, न सोने का अभिमान, बस कर्मों में सच्चाई हो, हृदय में श्रीराम का नाम। सेवा में अपनी शक्ति रख, प्रेम में उजियारा कर, अपने छोटे-छोटे कर्मों से दुनिया को रोशन कर। अंतिम मुखड़ा हनुमान सा उठ चल, निर्भय बन, आज़ाद बन, जिस शक्ति के लिए तरसे मन, उस शक्ति की आवाज़ बन। पर्वत चाहे ऊँचा हो, सागर चाहे विशाल, विश्वास अगर साथ रहे, जीत होगी हर हाल। हनुमान सा उठ चल, आँखों में अग्नि जला, भक्ति रख अपने हृदय में और कर्मों से नाम बना। कोई राह न रोक सके, कोई तूफ़ान न थाम— साहस, सेवा, भक्ति के संग, जय श्रीराम, जय हनुमान! समापन जय साहस, जय विश्वास, उजियारा मन में भर, हनुमान की शक्ति जागे—हर कदम पर, हर पल पर।