Yaa Shaah Li

Yaa Shaah Li

zoya khan

0 喜欢4:462026年9月30日

由 HeartMuLa 创作

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把一个名字、一段回忆或你写的歌词,几分钟变成一首歌。

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提示词

## 🌹 कलाम-ए-फ़ैज़ — डॉ. अब्दुल वाजिद शाज़ली 🌹 ### **मुखड़ा** फ़ैज़-ए-मुर्शिद से मुनव्वर है दिल-ए-बेक़रार, उनकी निस्बत ने सँवारा मेरा हर इक इज़हार। **या शाज़ली... या शाज़ली...** दिल पुकारे बार-बार, डॉ. अब्दुल वाजिद शाज़ली, आपका फ़ैज़ रहे बरक़रार। --- ### **अंतरा — १** शाज़ली की निस्बत है, क़ादरिया का फ़ैज़ है, सुहरवर्दिया की रौनक, चिश्तिया का इश्क़ है। चारों जानिब बरसता है करम का आसमाँ, उनकी चौखट से मिला हमको सुकून-ए-जाविदाँ। दिल में उल्फ़त, लब पे ज़िक्र-ए-यार हो, हर नफ़स में इश्क़ का इज़हार हो। जिस तरफ़ देखें नज़र, फ़ैज़ ही फ़ैज़ हो, मुर्शिद-ए-करम की निगाह साथ हो। **या शाज़ली... या शाज़ली...** दिल पुकारे बार-बार, डॉ. अब्दुल वाजिद शाज़ली, आपका फ़ैज़ रहे बरक़रार। --- ### **अंतरा — २** आपकी सोहबत में मिलता है दिलों को इत्मिनान, आपकी नज़र-ए-करम से मिलता है दिल को अमान। एक नज़र हो जाए तो बदल जाए हाल-ए-दिल, आपके फ़ैज़ से महके रूह का हर एक मंज़िल। आपकी महफ़िल में क्या रंग-ए-वफ़ा होता है, ज़िक्र-ए-हक़ से दिल भी बेख़ुद सा हुआ होता है। जो भी आया है लिए दामन में अपना दर्द-ए-दिल, ले गया है आपकी चौखट से करम की इक मंज़िल। --- ### **तरन्नुम / कोरस** **फ़ैज़ बरसा... फ़ैज़ बरसा...** दिल पे उनका फ़ैज़ बरसा... इश्क़ जागा, दिल सँवरा, रूह में इक नूर उतरा... **या शाज़ली... या शाज़ली...** दिल पुकारे बार-बार... डॉ. अब्दुल वाजिद शाज़ली, आपका फ़ैज़ रहे बरक़रार... --- ### **अंतरा — ३** क़ादरिया की शान हो, शाज़ली की आन हो, सुहरवर्दिया का फ़ैज़ हो, चिश्तिया की जान हो। इन मुक़द्दस सिलसिलों की पासबानी हो सदा, इश्क़-ए-रसूल-ए-पाक़ ﷺ की मेहरबानी हो सदा। निस्बतों का ये सिलसिला यूँ ही आबाद रहे, हर मुरीद के दिल में इश्क़-ए-मुर्शिद आबाद रहे। लब पे दरूद-ओ-सलाम, दिल में अदब-ओ-एहतराम, हर नफ़स में हो मुहब्बत, हर घड़ी उनका पयाम। --- ### **अंतिम सलाम** ऐ साहिब-ए-फ़ैज़, ऐ रहबर-ए-अहल-ए-दिल, आपकी निस्बत से है आबाद ये महफ़िल। हम गुनहगारों पे भी इक नज़र-ए-करम रहे, दिल में आपका इश्क़ और लब पे आपका ज़िक्र रहे। या इलाही! इस सिलसिले को क़ायम रख सदा, फ़ैज़-ए-मुर्शिद से भर दे हर दिल-ए-मुब्तला। **शाज़ली... क़ादरी... सुहरवर्दी... चिश्तिया...** इश्क़ की ये राह रहे रौशन सदा। **या शाज़ली... या शाज़ली...** दिल पुकारे बार-बार... **डॉ. अब्दुल वाजिद शाज़ली,** आपका फ़ैज़ रहे बरक़रार... 🌹 **फ़ैज़ रहे... करम रहे... निस्बत रहे... मुर्शिद की मोहब्बत दिल में हरदम रहे।** 🌹