
जिउतिया माता
Priyanshu Singh
由 HeartMuLa 创作
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提示词
जय हो माता जिउतिया की, जय हो संतान की रक्षा करने वाली माता की। माँ के हृदय में बसती है ममता, और ममता में बसता है संतान का संसार। जब भी आता है जिउतिया का पावन त्योहार, माँ अपने लाल की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए श्रद्धा और विश्वास से यह कठिन व्रत करती है। कहते हैं बहुत समय पहले एक नगर में एक धर्मपरायण स्त्री रहती थी। उसके हृदय में अपने पुत्र के लिए अपार प्रेम था। वह प्रतिदिन भगवान का स्मरण करती और कहती— “हे प्रभु, मेरे जीवन में चाहे कितने भी दुःख आएँ, लेकिन मेरे बच्चे पर कभी कोई संकट न आए।” एक दिन उस नगर में एक महात्मा आए। उन्होंने उस माता को संतान की रक्षा के लिए जिउतिया व्रत की महिमा बताई। महात्मा ने कहा— “माँ, यह व्रत केवल भूखे रहने का नाम नहीं है। यह तो माँ के अटूट प्रेम, श्रद्धा और संकल्प का प्रतीक है। जो माता अपने पुत्र की मंगलकामना से सच्चे मन से जिउतिया व्रत करती है, वह भगवान से अपने बच्चे के सुखी और दीर्घ जीवन की प्रार्थना करती है।” माता ने श्रद्धापूर्वक व्रत का संकल्प लिया। दिनभर भगवान का स्मरण किया, जिउतिया माता की पूजा की और अपने पुत्र के लिए प्रार्थना करती रही। रात के शांत वातावरण में उसने हाथ जोड़कर कहा— “हे जिउतिया माता, मेरे बच्चे के जीवन से हर संकट दूर करना। उसके सिर पर अपना आशीर्वाद रखना। उसकी राहों में सुख के दीप जलाना। मेरी ममता की लाज रखना, मेरे लाल को सदैव सुरक्षित रखना।” माता की श्रद्धा देखकर देवी का हृदय प्रसन्न हुआ। कहा जाता है कि माता की सच्ची कभी व्यर्थ नहीं जाती। तभी से माताएँ जिउतिया के पावन व्रत में अपने बच्चों की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य, सुख और मंगल की कामना करती हैं। जिउतिया माता की जय-जयकार, माँ करे लाल का बेड़ा पार। आँचल में रख लेना मेरे लाल को, दूर करो हर संकट काल को। माँ की आँखों में एक ही सपना, सुखी रहे उसका बच्चा अपना। तेरे चरणों में शीश झुकाएँ, तेरी महिमा गाएँ, माँ गाएँ। जिउतिया माता, सुन लो पुकार, बच्चों पर रखना अपना प्यार। घर-आँगन में खुशियाँ भर देना, माँ की झोली सुख से भर देना। हे माता, रखना ऐसी छाया, दूर रहे हर दुःख की माया। लंबी हो मेरे बच्चे की उमर, तेरा आशीष रहे हर पहर। जय जिउतिया माता, जय जगदंबे, माँ के मन की सुन लो बातें। संतान के सुख की खातिर, माँ करती है तेरी आराधना रातें। जो भी माता श्रद्धा से आए, तेरे चरणों में शीश झुकाए, उसके घर में मंगल हो माता, सदा रहे खुशहाल परिवार। जिउतिया का व्रत हमें यह संदेश देता है कि माँ का प्रेम संसार की सबसे पवित्र शक्तियों में से एक है। यह व्रत मातृ प्रेम, श्रद्धा, त्याग और संतान के मंगल की कामना का प्रतीक है। हे जिउतिया माता, सभी माताओं की मनोकामना पूर्ण करना, सभी संतानों को सुखी रखना और हर परिवार पर अपनी कृपा बनाए रखना। जय जिउतिया माता। जय संतान रक्षक माता।