जय बजरंग
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जय बजरंग

Amit kuhar

0 喜歡3:53Oct 24, 2026

由 HeartMuLa 創作

也為自己做一首這樣的歌

把一個名字、一段回憶或你寫的歌詞,幾分鐘變成一首歌。

做成禮物

提示詞

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुं लोक उजागर।। रामदूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।। महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी।। कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुण्डल कुंचित केसा।। हाथ बज्र और ध्वजा बिराजे। कांधे मुंज जनेऊ साजे।। शंकर सुवन केसरी नंदन। तेज प्रताप महा जग वंदन।। विद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर।। प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया।। सूक्ष्म रूप धरि सियहि दिखावा। विकट रूप धरि लंक जरावा।। भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचंद्र के काज संवारे।। लाय सजीवन लखन जियाये। श्री रघुवीर हरषि उर लाए।। रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।। सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।। सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा।। जम कुबेर दिक्पाल जहां ते। कवि कोविद कहि सकैं कहां ते।। तुम सुग्रीवहि कीन्ह उपकारारा। राम मिलाय राज पद दीन्हा।। तुम्रो मन्त्र बिभीषण माना। लंकेश्वर भए सब जग जाना।। जुग सहस्र योजन पर भानू। लिल्यो ताहि मधुर फल जानू।। प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।। दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।। राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे।। सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डरना।। आपन तेज संहारो आपै। तीनों लोक हांक तें कांपै।। भूत पिशाच निकट नहीं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै।। नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा।। संकट से हनुमान छुड़ावै। मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।। सब पर राम तपस्वी राजा। उन के kaj सकल तुम साजा।। और मनोरथ जो कोई लावै। सोइ अमित जीवन फल पावै।। चारों जुग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा।। साधु संत के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे।। अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस वर दीन जानकी माता।। राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा।। तुम्हरे भजन राम को पावै। जनम जनम के दुख बिरावै।। अंतकाल रघुवरपुर जाई। जहां जन्म हरि-भक्त कहाई।। और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेइ सर्व सुख करई।। संकट कटै मिटे सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।। जय जय जय हनुमान गोसाईं। कृपा करो गुरुदेव की नाईं।। जो सत बार पाठ कर कोई। छूटहि बंदी महासुख होई।। जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा।। तुषारदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय महं डेरा।।